बंद करे

जंगल

पौड़ी के जंगल

पौड़ी के जंगल

पौड़ी जिले में काफी जंगल है और ये  जंगल कई उद्योगो को आधार, ईंधन की लकड़ी की स्थानीय जरूरत, चारा संसाधनऔर पारिस्थितिक स्थिरता प्रदान कर रहे हैं। इक क्षेत्र के वन क्षेत्र में काफी भिन्नता है। इस तरह की भिन्नता ऊंचाई, जलवायु, चट्टानों, मिट्टी आदि पर आधारित होती है। वर्ष 1999-2000 में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले का कुल वन क्षेत्र 443977 है जो कुल जिले की कुल भूमि का 59% है। वन विभाग के तहत 366212 हेक्टेयर भूमि आती है।

खैर/सिस्सो वन

जिन्हें रिवेई वन कहा जाता है, और ये निम्न ऊंचाई के क्षेत्र में होते हैं। इसके मुख्य घटक प्रजातियां खैर, साल,शीशम, बांस आदि हैं । इन जंगलों में बांस की विभिन्न किस्म भागो में या मुख्य प्रजातियों के साथ मिश्रित होती हैं। साल के वन रिखनीखाल के रथुआदाब और जहरीखाल के निचले स्थानों पर पाए जाते हैं।

चीड वन

नय्यर छेत्र में सबसे बड़े पैमाने पर विकसित  हैं। जिसकी मुख्य प्रजातियां पिनस रॉक्सबरी हैं जो की चीड का एक शुद्ध रूप में होती हैं। यह वन 900 मीटर से 1500 मीटर तक की उचाई पर होते है।                                                                                                                                         

ओक वन

800 मीटर से पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र की उच्चतम ऊंचाई तक में पाए जाते है ।  इसकी मुख्य प्रजातियों में क्वार्सस सेमिरापीफोलियाबंज, क्यू इंकानाबंज,बुरांश  शामिल हैं। ये वन जिले के दक्षिणी क्षेत्र में  नम, छायादार एवं ढाल में होते है। कभी-कभी वे चीड के जंगलों के साथ मिश्रित होते हैं, जो कि नमदार और ठंडी जगह होती है। जंगल का घनत्व 0.4 से 0.8 के बीच होता है। बड़े पैमाने पर यह देखा गया है कि यह वन नमी के साथ जुड़ा हुआ है

देवदार वन

उच्च ऊंचाई के क्षेत्रों तक ही सीमित होते  है। यह हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले सबसे सुंदर वनों में से एक है । एक पेड़ की लम्बाई 35 मी और व्यास 110 सेमी  तक हो सकता है । इसकी मुख्य प्रजाति सीडरस देवदार है।  देवदार के वन पौड़ी, ताडकेश्वर, दुदातोली आदि क्षेत्रों में होते हैं।

उपयोग

चीड और देवदार के पेड़ लकड़ी, कागज और माचिस उद्योगो में इस्तेमाल किया जाते है। ये उद्योग गढ़वाल पहाड़ियों के निकट गंगा मैदान में स्थित हैं।  खैर की लकड़ी कोट्द्वार और उत्तर प्रदेश की कत्था फैक्ट्री के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। राल  के उत्पादन के लिए चीड के जंगलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यह राल,  राल और तारपीन कारखानों को आपूर्ति किया जाता है। ये जंगल कागज उद्योग, माचिस उद्योग,गोंद, पेंट फाइबर और कुछ वन उत्पादों के लिए उपयोग किया जाते हैं। स्थानीय लोग इन जंगलों पर काफी हद तक निर्भर करते हैं। वे खाना और गर्म करने के लिए अपनी ईंधन की लकड़ी, पशुओं के लिए चारा, घर की छतो के लिए घास, कृषि उपकरणों के लिए छोटी लकड़ी, घर के निर्माण के लिए लकड़ी इन्ही वनों से प्राप्त करते हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय लोगों के 90% से अधिक मवेशी इन वनों में चरते हैं।