पर्यटन विभाग

दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना 

उत्तराखंड की यात्रा में होने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को अभूतपूर्व अनुभव प्रदान करने के साथ ही स्थानीय लोगो की खुशहाली के लिये उत्तराखंड सरकार द्वारा दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे योजना शुरु की गयी है। अब आप अपने घर का पर्यटकों के विश्राम स्थल के रुप में उपयोग कर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर कर सकते है।
राजकीय सहायता की धनराशि:-
सचिव, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश सं0-857/VI(1)/2018-03(05)/2015 दिनांक 20 अप्रैल, 2018 के द्वारा दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजनान्तर्गत राजकीय सहायता की धनराशि मूल सब्सिडी एवं ब्याज पर सब्सिडी का संयोजन होगी। इसमें पूंजी संकर्म की लागत के 25 प्रतिशत या रू0-7.50 लाख, इसमें जो भी कम हो, मूल सब्सिडी के रूप में प्रथम पांच वर्षों में ऋण के सापेक्ष देय ब्याज का 50 प्रतिशत अधिकतम रू0-1.00 लाख प्रतिवर्ष की दर से देय होगी, परन्तु पर्वतीय क्षेत्र के लाभार्थियों हेतु पूंजी संकर्म की लागत के 33 प्रतिशत या रू0-10.00 लाख, इसमें जो भी कम हो, मूल सब्सिडी के रूप में एवं प्रथम पांच  वर्षों में ऋण के सापेक्ष देय ब्याज का 50 प्रतिशत अधिकतम रू0-1.50 लाख प्रतिवर्ष की दर से देय होगी। पर्वतीय क्षेत्रो के निर्धारण हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग उत्तराखंड शासन द्वारा प्रख्यापित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति 2015 के अन्तर्गत श्रेणी-ए, बी, बी+ एवं सी को इस योजना हेतु पर्वतीय क्षेत्र एवं श्रेणी- डी को मैदानी क्षेत्र माना जायेगा।

विवरण 


वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना

उत्तराखंड राज्य के निवासियों एवं मुख्य रुप से युवावर्ग को पर्यटन सेक्टर में अधिकाधिक स्वरोजगार, उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तराखंड की प्रथम स्वरोजगार योजना वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना का प्रारम्भ किया गया।
योजना के अवयव:-
इस योजना में बस/टैक्सी परिवहन सुविधाओं का विकास, मोटर गैराज/वर्कशाप निर्माण, फास्टफूड सैन्टर्स की स्थापना, साधना कुटीर/योग ध्यान केन्द्रो की स्थापना, 8-10 कक्षीय मोटेलनूमा आवासीय सुविधाओं की स्थापना/होटल, स्थानीय प्रतिकात्मक वस्तुओ के विक्रय केन्द्रो की स्थापना, साहसिक क्रियाकलापों हेतु उपकरणो का क्रय, पी0सी0ओ0 सुविधायुक्त आधुनिक पर्यटन सूचना केन्द्रो की स्थापना तथा टैन्टेज आवासीय सुविधाओं के विकास तथा क्षेत्र विशेष के आकर्षणों एवं विशेषताओं के अनुरुप किसी पर्यटन अभिनव परियोजना पर भी विचार किया जा सकता है।
राजकीय सहायता की धनराशि:-
राजकीय सहायता की धनराशि पर्वतीय क्षेत्र के लाभार्थियों हेतु प्रयोजन के लिये (गैरवाहन मद में) पूंजी संकर्म की लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम रु0 15.00 लाख इसमें जो भी कम हो किया गया है।
वाहन मद में पूंजी संकर्म की लागत के 25 प्रतिशत या रु0 10.00 लाख इसमें जो भी कम हो से अधिक नही होगी।
योजना लागत का 87.5 प्रतिशत बैंक ऋण तथा 12.5 प्रतिशत उधमी द्वारा मार्जिन मनी के रूप में जमा की जायेगी। राजसहायता योजना पूर्ण होने के उपरान्त ही निर्गत किये जाने का प्रावधान है।

विवरण